12th exam

जयशंकर प्रसाद का कवि परिचय लिखें !

प्रशन 1 .जयशंकर प्रसाद का कवि परिचय लिखें !

उतर.आधुनिक हिंदी की स्वच्छंद काव्य धरा के अंतर्गत छायावादी काव्य प्रवाह के प्रवर्तक में जयशंकर प्रसाद उल्लेखनीय हैं ! जयशंकर प्रसाद का जन्म 1889 ई में काशी में हुआ था ! इनके पिता देवी प्रसाद साहू थे! इनकी शिक्षा घर पर ही प्रारंभ हुई !कुछ समय बाद स्थानीय कवीन्स कॉलेज में प्रसाद का नाम लिखा दिया गया पर वे वहाँ आठवीं कक्षा तक ही पढ़ सके !प्रसाद एक अध्यवसायी व्यक्ति थे और नियमित रूप से अध्यन करते थे !काव्य पार्टीभी बारह वर्ष में ही दिखी !कलाधर उपनाम से ब्रजभासा में सवैया की रचना की  काव्य धीरे -धीरे समय के साथ प्रसाद की सृजनशीलता निरखने लगी !

सन 19918 ई में पहला काव्य संकलन झरना प्रकासित हुआ !फिर इनके बाद 1925 ई में आँसू और 1933 ई में पहला लहार ! प्रसाद ने कविता के साथ कहानी नाटक इत्यादि भी लिखे ! इसनेक नाटकों में विशाख (1921 ई )कामना (1927 )जनमेजय का नाग यग (1926 ई ), स्कंदगुप्त (1928 ई ) ध्रुवस्वामिनी (1933 )आकाशदीप (1929 ई )आँधी (1931 ई )  इंद्रजाल (1936 ई )इत्यादि !प्रसाद के कथा -संग्रह है -कंकाल (1929 ई ),तितली (1934 ई )इरावती अपूर्ण उपन्यास है ! तथा काव्य और कला उनका निबंध संग्रह हैं !

इससे स्पष्ट हो जाता है की प्रसाद बहुमुखी प्रतिभा के धनि कलाकार हैं ! कामायनी महाकाव्य उनका गौरव ग्रन्थ है !इसमें आदि मानव मनु की कथा है ! कवी ने इसे कथा के सहारे अपने युग के मत्वपूर्ण प्रशनो पर विचार किया है ! ‘ कामायनी ‘ में मनोविकारों का मूर्तिकरण किया  गया है ! प्रसाद ने छायाबादी काव्य भाषा की अभिव्यक्ति के अनुरूप तत्सम प्रधान संस्कृतनिष्ट और ऐसी नविन भाषा का प्रयोग किया जिसमें छायावादी गुण  लाक्षणिकता चित्रात्मता अमूर्तन रस्यात्मकता दार्शनिकता संगीतात्मकता आदि का आग्रह समाहित हो जाता है !

वास्तव में प्रसाद ने ऐसी काव्यभाष का निर्माण किया जो पद्धिति में परंपरा का पूर्ण निषेध न होकर उसका पुनजर्न्म था ,उसमे परंपरा की नवीन स्मृत्ति थी !


तुमुल कोलाहल कलह में शीर्षक कविता का सारांश लिखें !

जयशंकर प;प्रसाद छायावादी कवी है ! प्रसाद मुखयतः गहन अनुभूति के रचनाकार है ! उनके अनुभव की सीमाएं है और इसी कारण यथार्थवादी लेखकों जैसे व्यापकता उनमे प्राप्त नहीं होता ! अध्ययन -मनन द्वारा उन्होंने इतिहास की दृस्टि प्राप्त की थी और कामायनी में उनका युगबोध सहज ही देखा जा सकता है ! प्रसाद का समस्त सहित मानवीय और सांस्कृतिक भूमिका का प्रतिषिठत है! प्रेम सौन्दर्य आदि की अनुभूतिया उनकी मानवीयता से सम्बंद रखती है ! प्रस्तुत कविता प्रसाद की दुनिया के बारे में समझ का प्रतिफलन है !

तुमुल कोलाहल कलह में कविता महाकाव्य कामायनी के निर्वेद सर्ग से उद्रित हैं ! इड़ा के प्रजा और मनु के मध्य युद्ध की समाप्ति के बाद सर्वत्र शोक का वातावरण चाय हुआ था ! तभी दूसरी ओर से श्रद्धा आ जाती है ! ेड़ा ने विरहिणी श्रद्धा को आश्रय दिया , किन्तु जब श्रम ने मूर्चिछत अवस्था में पड़ हुए मनु को देखा तो उनकी बेदना अत्यधिक मुखर हो उठी ! दीर्घकाल के पशचात श्रद्धा और मनु का मिलान होता है ! श्रद्धा मनु को बताती है की वह भावनाओ  के कोलाहल में शान्ति की दुतिनि है ! छायावादी कवियों की यह विशेषता है बुद्धि का मनु का ! मन इन दोनों से संचालित होता है ! व्यक्ति जब विचारो के उथल पुथल में हो तब उसे हिर्दय की बात माननी चाहिए

मनु को सम्बोधित करते हुऐ श्रद्धा कहती है की –

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