12th exam

मलिका मुहमद जायसी का कवी परिचय लिखें !

मलिक मुहमद जायसी परिचय

 

उत्तर – हिंदी के प्रसीद सूफी, जिनके लिए केवल जायसी  सब्द का प्रयोग भी उनके उपनानाम की भॉति किया जाता है यह इस बात को भी सूचित करता है वे जायस नगर के निवास थे इस सम्भन्ध में उनका स्वय भी कहना है – ”जायस नगर सथानु ” जायसी की किसी उपलब्ध रचना के अंतरगत उसकी निश्चित जन्म तिथि अथबा जन्मसवंत का कोई अस्पस्ट उललेख नहीं पाया जाता परन्तु अनुमानतः 15 वि सती के उत्तरार्ध लगभग 1492 ई माना जाता है जायसी ने कईं ग्रन्थ रची जिसमे 1.

पद्माबत 2 अखराबट 3. आखिरि कलम 4 महरी बाईसी इत्यादि हैं परन्तु उनके यस का आधार उनका पदमावत हीं है ! पद्मावत के दोहे से पता चलता है, की जबसे जायसी अपना प्रियतम उनके दाहिने होकर परत्यक्ष हुआ तबसे बाई दिशा की और से सुनना तथा उस ओर देखना भी छोड़ दिया ! जिसका एक अभिप्राय यह हो सकता है की उनके बाये नेत्र और कान सकतीहींन थें ! जायसी का पद्मावत परेमाख्येयंन काव्यों की परमपरा में सर्ब्स्रेस्ट स्थान रखता है यह उनकी धर्म – भावना पर ही आधारित है !इस कारन इसमें प्रेम की साधना है ! इस साधना का साधक लैकिक प्रेम से अलैकिक प्रेम की ओर अग्रसर होता है ! सूफी मानते है कि वे (जिव )अपने प्रिये (अललाह )से बिछुड़ गए है इसीलिए वे अपने प्रिये से मिलने के लिए तड़पा करते है

कवी मलिक मुहमद जायसी 

प्रिये से मिलने की जितनी अधिक तड़पने और छटपटाहट उनमें होती है उतनी ही सफल उनकी साधना होती है इसी लिए उनके काव्य का चर्मोंतकर्ष उनके वियोग -वर्णन में सनिहित रहता है ! हिंदी में कवियों की जो रचनाएँ मिलती है उनसब में यही विसेसता पायी जाती है इस विसेसता के सामियक निर्बाह के लिए कल्पितप्रेमाख्यान कहते हैं की कथा के पहला पूर्वार्ध दूसरा अतरौली चित्तौड़ के राजा रतन सेन और हरदीप की राजकुमारी पद्मिनी के विवाह संबंध है भारत में और अलादीन की चित्तौड़ आक्रमण के करने आदि की कथा उत्तरार्ध में आती है इन दोनों को 1 जून तक और जैसी ने जोकर थाना के उसमें प्रेम के लोक पाछे अध्यात्म पथ का इतिहास और कल्पना

और समाज नीति और राजनीति का भारतीय महाकाव्य शैली और फारसी के और मुसलमानी बात में है कि नमूना बन गया जायसी की भाषा टेट अवधि है जन जन की भाषा हायकॉम चित्र में उनका उद्देश्य जीवन की पीके अनुभूतियों का चित्रण कर किसी आदर्श की स्थापन कर बिरहा की अग्नि को चुनता है मार्मिक अतियंत्रथ्वयवरथ भरा हुआ यह प्रेम अत्यंत व्यापक गुढासयो बाला और महिमा है यहां स्तुति के प्रथम कालबाग में विनर में स्वाभिमान के साथ अपनी रूपों और एक आंख के अंधे कीर्ति प्राप्त दृष्टा तो और द्वारा महिमा नी वत करते हुए रूप से अधिक अपने गुणों की ओर हमारा ध्यान खींचते हैं उनकी कथा सृष्टि के बारे में हमें बताते हैं वे कहते हैं कि उन्हें लगाकर जोड़ा प्रीति के नए जल में भिंगोई हुए है

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