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रोज शीर्षक कहानी सारांश Roj khani

1 . रोज शीर्षक कहानी का सारांश लिखें या चात्रित्र चित्रण !

उतर – रोज शीर्षक कहानी के रचियता आधुनिक हिंदी सहित के मूधर्न्य विद्वान श्री सच्चिदानंद हीरानंद वत्यस्यायन अज्ञेए है !ये एक प्रमुख कवी, कथाकार उपन्यास्कार विचारक ,पत्रकार और संवादक है उन्होंने साहित्य के अनेक नई विधाएँ यात्रा-साहित्य डायरीआलोचन जीवनी इत्यादि पर्याप्त मात्रा में लिखें है

‘रोज ‘अज्ञेयजी की बहुचर्चित कहानी है इन्होने मध्यवर्ग भारीतय समाज में घरेलू स्त्री के जीवन और मनोदशा पर सहानभूति पूर्वक विचार किया है इस कहानी में मल्टी नामक एक नारी पात्र है जो लेखक की रिश्ता में बहन लगती है दोनों बचपन में साथ साथ पले और बढे है विद्याथी जीवन में मालती अत्यंत चंचल और उचाखल प्रवति के लड़की थी उसे पढ़ने से अधिक खेलने में रूचि थी !उसकी शादी डॉक्टर से होती है डाक्टर साहव अच्छे सहभाव के व्यक्ति हैं ,उसका नाम महेश्वर है !वे शहर से दूर किसी पठारी क्षेत्र में पदस्तापिक है मालती उनके साथ उसी पहाड़ी क्षेत्र में सरकारी रूम में रहता हूँ लेखक एक बार मालती से मिलने आते है !

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विवाह के बढ़ मालती के अनदेशा पुनः बदल गई !उसका जीवन मशीन तुल्य हो गया है वह सुबह होकर अपने पति के लिए नास्ता बनती है फिर दोपहर के लिए खाना बनाती है फिर शाम को खाना बनती है वह गृह कार्य में इस प्रकार लगी  रहती है मनो कोई यंत्र हो गया है उसका जीवन यत्रवतृ हो गया है लेखक के आने पर उसका स्वागत आपेक्षित ख़ुशी के साथ नहीं करती है मात्र औपचरिकता बस में बाते करते है डाक्टर साहव दोपहर की डिस्प्रेसरी में घर आते है ! लेखक का परिचय उनके साथ होता है वे अपने मरीजों के बारे में बताते है की वे अक्सर मिरेजो का हाथ पैर काटा करते है छोटे छोटे जख्म गैंग्रीन हो जाता है फिर किसी के हाथ पैर काटकर ओप्रेशन करते है !

रोज शीर्षक

मल्टी का एक छोटा  बच्चा है जिसका नाम टीटी है वे सदैव रोते रहता है वो काफी चिड़चिरडा सा है लेखक अनुभव करता है की मालती के घर में जैसे किसी अभिशाप की चाय फैली है इस घर का बातावरण बोजिल और हाटसपूर्ण है कई उत्साह और उमंग नहीं है यद्यपि डॉक्टर साहव बुरे नहीं है वे अपने काम में लगे रहते है पहाड़ पे इस्थित इस कावटर के न तो ठीक से पानी आते है न तो हरी सब्जी उपलब्ध है यहाँ पर कोई स्नैचर पात्र नहीं आता है यहाँ पढ़ने लिखने का कोई साधन नहीं है ! इस त्रेः हम देखते है के मालती न तो एक सफल पत्नी और न ही सफल माँ है इनमे उनका चात्रित्र का कोई दोष नहीं है ! परिस्थिथी ऐसे है की की मल्टी बदल गए है ! मालती जैसे लड़की शादी के बाढ़ बदल गए है !महिलाएं को गृह कार्य यत्रवत बना जाता है उसके जीवन में कोई संवेदना नहीं है कोई राग नहीं ! `


महवत्पूर्ण Objective बोर्ड परीक्षा !

1 .रोज कहानी कौन लिखा हैअज्ञेय

2 . अज्ञेय को कौन सा पृस्कार मिलाभारतीय ज्ञानपीठ प्रुस्कार

3 . अज्ञेय जन्म हुआ7 मार्च 1911

4 . रोज कहानी का नायिका हैमालती

5 . अज्ञेय का पिता का नाम हैडाक्टर हीरानंद शास्त्री

6 .अज्ञेय किस बाद के कवी हैप्रयोगवाद

7 .मालती का पति क्या थाडाक्टर

8 . मालती की बचे का क्या नाम थाटीटी

9 .गैंग्रीन क्या हैएक बिमारी

10 .रोज कहानी कितने घंटे में समाप्त होती है11


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Ranjay Kumar is a Bihar native with a Bachelor's degree in Journalism from Patna University. With three years of hands-on experience in the field of journalism, he brings a fresh and insightful perspective to his work. Ranjay is passionate about storytelling and uses his roots in Bihar as a source of inspiration. When he's not chasing news stories, you can find him exploring the cultural richness of Bihar or immersed in a good book.

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